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कुर्था के लारी गांव में पहली बार पहुँचे बिहार के राज्यपाल

कुर्था के लारी गांव में पहली बार पहुँचे बिहार के राज्यपाल

रिपोर्ट, संजय सोनार


कुर्था (अरवल) स्थानीय प्रखण्ड के अहमदपुर हरणा पंचयात के लारी गांव में आयोजित चतुर्मासा महायज्ञ के सुभारम्भ के मौके पर पहुँचे बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहमद खान जहाँ लारी गढ़ पर आयोजित कार्यक्रम में पहुँचते ही अरवल डीएसपी कृति कमल,एसडीओ संजीव कुमार,डीडीसी कुर्था पुलिस निरीक्षक अजय कुमार सिंह समेत जिले के कई अधिकारियों ने राज्यपाल को हरे पौधे देकर स्वागत किया

 

जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने गॉड ऑफ ऑनर दी जिसके बाद राज्यपाल मंचासीन हुए वही उन्होंने मंच पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का सुभारम्भ की राज्यपाल के सम्मान में स्वागत गान हुई साथ ही राज्यपाल को लारी ग्रामबासियो द्वारा अंग बस्त्र देकर समानित किया। इस मौके पर राज्यपाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार व केंद्र की सरकार ने विकास की नई इबादत लिखी हम लोग जब अपने राज्य से दूसरे प्रदेश में जाते हैं तो बिहारी कहलाते हैं लेकिन जैसे ही बिहार वापस आते हैं तो जात-पात में बट जाते हैं पहले जहां लोगों को सड़क की समस्या से जूझना पड़ता था आने-जाने में काफी परेशानी होती थी आज लोगों को आने जाने का सुगम व्यवस्था हो रही है हालांकि और व्यवस्था करने की आवश्यकता है

 

साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा को दूसरी परंपराओं के साथ तुलना इस तरह करने लगे जैसे दो धाराएं बराबर में बह रही यह धारा तो वह है जो समावेशी धारा है जो सबको अपने अंदर किसी की भी दुनिया में उनकी अपनी उनके लिए सम्मान है उनका तरीका जो है उसके लिए स्वीकार्यता है और मैं तो कहूंगा कि एक तरफ सनातन की परिभाषा यह की जो यह मानता है की हर किसी को यह अधिकार है उसका नैसर्गिक उसका जन्मजात अधिकार है कि वह अपने तरीके से अपने पैदा करने वाले तक पहुंचाने की कोशिश कर सके उसका आत्मबोध कर सके वह सनातनी है और भी बहुत सी परिभाषाएं यम्मा पक्ष की सर्वत्र सर्वम न पूर्ण स्वामी सांचा में ना पीना शक्ति जो समझ जीवन में मुझे देखा है यानी प्रभु को देखा है और उसे एक प्रभु में सबको देखा है

 

 

भगवान कृष्ण कह रहे हैं न कोई कभी प्रभु से अलग होता है ना कभी प्रभु अलग होते हैं यह जो सार्वभौमिकता है मैंने महाराज जी जैसे किसी ज्ञानी से कई साल पहले की बात है मैंने पूछा महाराज हम कहते हैं सर्वे भवंतु सुखेन सर्वे संतु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यंतु मां कच्ची दुख भागबत हम जो भी हैं उसमें अपने कल्याण की प्रार्थना नहीं करते सब के कल्याण की प्रार्थना करते हैं कोई ऐसी भी प्रार्थना है जिसमें अपने कल्याण की बात की गई हो और सबको नकारा गया हो यह कहा गया हो जो यह मानते हैं उनका कल्याण हो वह ज्ञानी पुरुष थे उन्होंने क्या मुझसे कहा ऐसी कोई प्रार्थना मेरी भी सामने से आज तक नहीं गुजरी तो यह देश इसकी संस्कृति अकेली है जो सबके कल्याण की बात करती हम उसे कितना परिचित हैं हमारा अचार उसके कितने अनुसार है इसमें हमारे अंदर कमी हो सकती लेकिन हमारी परंपरा में हमारे महर्षियों की मणि मुनियों की मनुष्यों की सोच में तो अभी महाराज ने बताया कि हमारी कल्पना तो है कि पूरा विश्व हमारा परिवार है और एक जगह नहीं है सब जगह इसी पर जोर है अन्नपूर्णा सादापूर्ण शंकर प्राण वल्लभ ज्ञान बैराग सिद्ध अर्थम भिक्षम देही पार्वती माता का पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरा बंधवा मानब धर्म सारे इंसान आपस में एक है भाई हैं एक परिवार हैं स्वदेसी प्रेम और मेरा देश क्या है जिसके नाथ महादेव हैं वह मेरा देश यह भारतीय समाबेस जिनकी सोच बड़ी होती है जो सबके कल्याण का सोचते हैं वह आनंद और शांति में रहते हैं ना अल्पेश सुखम अस्ति और जो केवल अपने बारे में छोटी सोच रखते हैं कि बस मेरा कल्याण हो उन्हें कभी चैन और सुख से नही रहते।

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